गढ़वा। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पंडित हर्ष द्विवेदी कला मंच द्वारा आयोजित मासिक साहित्यिक कार्यक्रम “काव्यानुरागी” के अंतर्गत नवादा मोड़ स्थित बंधन मैरिज हॉल में भव्य काव्य संध्या का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साहित्यकारों, शिक्षकों, कलाकारों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने काव्य-पाठ और विचारों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान नटराज की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्चन के साथ हुई। मंच संचालन करते हुए प्रमोद कुमार ने विश्व पर्यावरण दिवस की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अंधाधुंध वृक्ष कटाई और घटते वन क्षेत्र के कारण पर्यावरण गंभीर संकट में है। उन्होंने पॉलिथीन के बढ़ते उपयोग पर चिंता जताते हुए प्रत्येक व्यक्ति से कम-से-कम एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने का संकल्प लेने की अपील की।
कला मंच के निदेशक नीरज श्रीधर ने अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा चलाए जा रहे “आपन सरसतिया” अभियान की सराहना करते हुए इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में जासमीन खान ने “मानो तो मैं गंगा मां हूं...” गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। अधिवक्ता राजीव रंजन तिवारी ने “अमरकंटक” कविता के माध्यम से नदियों की महत्ता को रेखांकित किया, वहीं शिक्षक धर्मेंद्र कुमार ‘पुष्कर’ ने जल संरक्षण पर भोजपुरी रचना प्रस्तुत की। प्रमोद कुमार ने दानरो एवं सरस्वती नदी की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रभावशाली कविता पाठ किया।
कार्यक्रम में संस्कार भारती के संरक्षक विजय सोनी ने पर्यावरण संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी बताया। अंत में गीतांश टीवी के निर्देशक प्रदीप कुमार गुप्ता ने सभी के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता का प्रभावी संदेश दिया।
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