गढ़वा:झारखंड के गढ़वा जिले में साहित्य, कला और समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय संस्था पं. हर्ष द्विवेदी कला मंच, नवादा द्वारा संचालित “काव्यानुरागी” आज नवोदित रचनाकारों के लिए एक सशक्त मंच के रूप में उभर कर सामने आया है। यह मासिक साहित्यिक आयोजन न केवल नए कवियों और लेखकों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर देता है, बल्कि उन्हें अनुभवी साहित्यकारों के मार्गदर्शन से भी जोड़ता है।
वर्तमान समय में जब साहित्यिक गतिविधियाँ सीमित होती जा रही हैं, ऐसे में “काव्यानुरागी” ने जिले में साहित्यिक चेतना को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह मंच गढ़वा का एकमात्र नियमित साहित्यिक आयोजन बन चुका है, जो लगातार नवोदित प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान कर रहा है।
इस मंच की खासियत यह है कि यह स्थानीय रचनाकारों को राष्ट्रीय स्तर के साहित्यकारों से जोड़ने का कार्य भी कर रहा है। समय-समय पर देश के प्रख्यात कवि आभासी माध्यम से जुड़कर प्रतिभागियों की रचनाओं को सुनते हैं और उन्हें भाषा, प्रस्तुति एवं विषय चयन पर महत्वपूर्ण सुझाव देते हैं। इस प्रकार यह आयोजन केवल काव्य-पाठ तक सीमित न रहकर एक साहित्यिक कार्यशाला का रूप ले चुका है।
गढ़वा जिले के कई युवा रचनाकारों ने इसी मंच से अपनी साहित्यिक यात्रा की शुरुआत की और आज राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रहे हैं। इन प्रतिभाओं को देश के सुप्रसिद्ध कवियों जैसे डॉ. हरिओम पंवार एवं डॉ. कुमार विश्वास की उपस्थिति में काव्य-पाठ करने का अवसर भी प्राप्त हुआ है, जिससे जिले का गौरव बढ़ा है।
“काव्यानुरागी” के आधार स्तंभ प्रमोद कुमार ने कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है और यह मंच नई पीढ़ी में संवेदनशीलता एवं रचनात्मक सोच विकसित करने का कार्य कर रहा है। वहीं मंच के निदेशक नीरज श्रीधर ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में साहित्यिक गतिविधियों को जीवित रखना चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन युवाओं की प्रतिभा और उत्साह इस प्रयास को सफल बना रहा है।
निस्संदेह “काव्यानुरागी” आज केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि नवोदित रचनाकारों के लिए प्रेरणा, संवाद और सृजन का एक जीवंत आंदोलन बन चुका है, जो गढ़वा की साहित्यिक पहचान को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
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