गढ़वा। परमेश्वरी मेडिकल सेंटर, गढ़वा में आधुनिक चिकित्सा के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई है। अस्पताल में लिवर की हाइडेटिड सिस्ट से पीड़ित दो मरीजों का सफल ऑपरेशन दूरबीन विधि (लैप्रोस्कोपिक सर्जरी) के माध्यम से किया गया। यह जटिल सर्जरी वरिष्ठ लैप्रोस्कोपिक एवं जनरल सर्जन डॉ. कुमार निशांत सिंह के नेतृत्व में सफलतापूर्वक संपन्न हुई।
विशेषज्ञों के अनुसार हाइडेटिड सिस्ट एक गंभीर परजीवी रोग है, जो इचिनोकोकस नामक टेपवर्म के संक्रमण से होता है। यह संक्रमण प्रायः संक्रमित कुत्तों या भेड़-बकरियों के संपर्क में आने अथवा दूषित भोजन और पानी के सेवन से फैलता है। इस बीमारी में लिवर के अंदर धीरे-धीरे पानी से भरी गांठ बनती है, जो लंबे समय तक बिना लक्षण के बढ़ सकती है। सिस्ट का आकार बढ़ने पर मरीज को पेट दर्द, सूजन, भूख में कमी, उल्टी, बुखार या पीलिया जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
डॉ. कुमार निशांत सिंह ने बताया कि समय पर इलाज नहीं होने पर सिस्ट के फटने का खतरा रहता है, जिससे पेट में संक्रमण फैल सकता है और जानलेवा एलर्जिक प्रतिक्रिया भी हो सकती है। उन्होंने कहा कि लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के माध्यम से ऐसे मामलों का उपचार अधिक सुरक्षित और प्रभावी ढंग से किया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि दूरबीन विधि से ऑपरेशन करने के कई लाभ हैं। इसमें बड़े चीरे की आवश्यकता नहीं होती, दर्द कम होता है, रक्तस्राव कम होता है तथा संक्रमण का खतरा भी कम रहता है। मरीज जल्द स्वस्थ होकर सामान्य जीवन में लौट सकता है।
यह सर्जरी तकनीकी रूप से अत्यंत चुनौतीपूर्ण मानी जाती है, जिसमें सिस्ट के द्रव को पेट में फैलने से रोकना, रक्तस्राव नियंत्रित करना और पित्त नलिकाओं की सुरक्षा करना बेहद जरूरी होता है। इस सफल ऑपरेशन में एनेस्थीसिया विशेषज्ञ टीम की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही, जिन्होंने ऑपरेशन के दौरान मरीजों की जीवनरक्षक प्रक्रियाओं की सतत निगरानी करते हुए सुरक्षित एनेस्थीसिया प्रबंधन सुनिश्चित किया।
अस्पताल में पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल के तहत आईसीयू/एचडीयू सुविधा, प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ, 24 घंटे आपातकालीन सेवा, आधुनिक जांच व्यवस्था एवं संक्रमण नियंत्रण की समुचित व्यवस्था उपलब्ध है, जिससे मरीजों की बेहतर देखभाल सुनिश्चित की जा रही है।
अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि उनका उद्देश्य गढ़वा एवं आसपास के क्षेत्रों के लोगों को महानगरों जैसी उन्नत चिकित्सा सुविधा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराना है, ताकि मरीजों को इलाज के लिए बाहर न जाना पड़े।
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