गढ़वा। भोजपुरी साहित्य, लोकनाट्य और लोकसंगीत के अमर पुरोधा भिखारी ठाकुर की पुण्यतिथि के अवसर पर पं. हर्ष द्विवेदी कला मंच के तत्वावधान में नवादा मोड़ स्थित बंधन मैरिज हॉल में “स्वरांजलि” कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिले के साहित्यकारों, लोक कलाकारों और कला साधकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान नटराज की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्चन के साथ हुआ। इसके बाद उपस्थित कलाकारों एवं अतिथियों ने भिखारी ठाकुर के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
विषय प्रवेश कराते हुए पं. हर्ष द्विवेदी कला मंच के निदेशक नीरज श्रीधर ‘स्वर्गीय’ ने कहा कि भोजपुरी भाषा और संस्कृति को वैश्विक पहचान दिलाने में भिखारी ठाकुर का योगदान अद्वितीय है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार संस्कृत साहित्य में कालिदास का स्थान है, उसी प्रकार भोजपुरी साहित्य में भिखारी ठाकुर का स्थान है, इसलिए उन्हें “भोजपुरी के कालिदास” कहा जाना सर्वथा उचित है।
लोक कला साधक प्रेम दीवाना व्यास ने कहा कि भिखारी ठाकुर ने कला को केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं बनाया, बल्कि समाज सुधार का सशक्त हथियार बनाया। उन्होंने अपनी प्रस्तुति “रे सजनी रे सजनी, पिया गइले कलकत्तवा...” से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
लोक गायक हैप्पी चंद्र ने “हँसी-हँसी पानवा खिऔले बेईमनवा...” गीत प्रस्तुत कर समां बांध दिया, जबकि अरविंद कुमार तिवारी ने अपनी स्वरचित रचना के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की। कला साधिका खुशबू कुमारी उपाध्याय ने “रोपेया गिनाई लिहलऽ, पगहा धराई दिहलऽ...” की मार्मिक प्रस्तुति देकर उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि भिखारी ठाकुर ने गीत, संगीत और नाटक के माध्यम से नारी की पीड़ा को जिस संवेदनशीलता से अभिव्यक्त किया, वह आज भी प्रासंगिक है। उनका जीवन संघर्ष, समाज सुधार और लोकसंस्कृति के संरक्षण की प्रेरणादायक गाथा है। उनके आदर्शों पर चलकर समाज को सकारात्मक दिशा देने का संकल्प ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
अधिवक्ता राजीव रंजन तिवारी ने कहा कि गढ़वा में भिखारी ठाकुर जैसी महान विभूतियों की स्मृति को जीवंत बनाए रखने का कार्य पं. हर्ष द्विवेदी कला मंच द्वारा निरंतर किया जा रहा है, जिसमें समाज के सभी वर्गों को सहयोग देना चाहिए।
कार्यक्रम के अंत में संस्कार भारती गढ़वा जिला इकाई के संरक्षक विजय सोनी ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि भिखारी ठाकुर जैसे महान व्यक्तित्व से नई पीढ़ी को अवश्य परिचित होना चाहिए, जिससे उनके जीवन को नई दिशा मिल सके।
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