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कबीर जयंती पर जीएन कॉन्वेंट में गूंजे संत कबीर के दोहे, छात्रों ने दिखाई प्रतिभा

गढ़वा : जीएन कॉन्वेंट स्कूल में संत कबीर दास की जयंती के पावन अवसर पर भव्य एवं प्रेरणादायक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन हिन्दी विभाग द्वारा सीनियर विंग के देखरेख में किया गया, जिसमें छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के निदेशक मदन प्रसाद केशरी एवं उपप्राचार्य बसंत ठाकुर द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर तथा संत कबीर दास के चित्र पर पुष्प अर्पित कर की गई।
इस अवसर पर अपने संबोधन में निदेशक ने कहा कि संत कबीर दास भारतीय संत परंपरा के ऐसे महान व्यक्तित्व हैं, जिनकी वाणी आज भी समाज को सही दिशा दिखाती है। उन्होंने कहा कि कबीर ने न केवल आध्यात्मिक चेतना को जागृत किया, बल्कि सामाजिक कुरीतियों और अंधविश्वासों पर भी करारा प्रहार किया। उनकी शिक्षाएं आज के आधुनिक दौर में भी पूरी तरह प्रासंगिक हैं।
उन्होंने कबीर के प्रसिद्ध दोहे का उल्लेख करते हुए कहा— “पोथी पढ़ी-पढ़ी जग मुआ, पंडित भया न कोय, ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।
कार्यक्रम के दौरान कबीर दास की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि वे एक जुलाहा परिवार में पले-बढ़े और जीवन भर कपड़ा बुनते रहे, लेकिन उनका वास्तविक कार्य समाज की सोच को नई दिशा देना था।
कबीर जयंती के अवसर पर विद्यालय में पेंटिंग, भाषण एवं कविता वाचन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को मेडल एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में हिन्दी शिक्षक कृष्ण कुमार, खुर्शीद आलम, मुकेश भारती, नीरा शर्मा, नीलम कुमारी, सरिता दुबे, सुनीता कुमारी, चंदा कुमारी, पुष्पा कुमारी, शिवानी कुमारी, पूजा प्रकाश एवं दिनेश कुमार सहित अन्य शिक्षकों की भूमिका सराहनीय रही।
अंत में धन्यवाद ज्ञापन संतोष प्रसाद द्वारा किया गया, जबकि मंच संचालन कृष्ण कुमार ने किया।

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