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जीएन कॉन्वेंट स्कूल में तुलसीदास जयंती समारोह: रामचरित मानस की गूंज से गूंजा सभागार, विद्यार्थियों ने जाना भक्ति, सदाचार और धर्म का संदेश

गढ़वा :समाज सेवा की सच्ची प्रेरणा रामचरित मानस की गाथा में निहित है। तुलसी साहित्य आज भी समाज को सदाचार, प्रेम, करुणा और धर्म के मार्ग पर चलने की निरंतर प्रेरणा देता है। इसी संदेश के साथ स्थानीय जीएन कॉन्वेंट स्कूल के सभागार में रामचरित के अमर रचयिता महान कवि एवं संत गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती धूमधाम से मनाई गई। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के निदेशक मदन प्रसाद केशरी एवं उपस्थित शिक्षकों द्वारा दीप प्रज्वलन कर तथा गोस्वामी तुलसीदास जी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर की गई। इसके पश्चात पूरा सभागार भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण से सराबोर हो गया।
उपस्थित छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए निदेशक मदन प्रसाद केशरी ने कहा कि तुलसीदास जयंती वह पावन अवसर है, जो रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास की स्मृति में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि यह पर्व विश्वभर के लाखों भक्तों एवं साहित्य प्रेमियों के लिए अत्यंत सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है। तुलसीदास भारतीय इतिहास के सबसे पूजनीय संतों एवं कवियों में से एक हैं, जिनकी रचनाओं ने समाज को नई दिशा दी है।
उन्होंने आगे कहा कि भगवान राम के प्रति उनकी गहन भक्ति और साहित्यिक योगदान ने भारतीय धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा पर अमिट छाप छोड़ी है। रामचरितमानस भगवान राम के जीवन, शिक्षाओं और वीरता की दिव्य गाथा को प्रस्तुत करता है, जो आज भी एक धर्मपरायण जीवन जीने का मार्गदर्शन प्रदान करता है।
निदेशक ने यह भी कहा कि तुलसी साहित्य समाज को सदाचार, प्रेम, करुणा और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। उनकी रचनाएँ भक्ति, धर्म और ईश्वर के प्रति प्रेम को जागृत करती हैं तथा आस्था, करुणा और सत्य के मार्ग पर चलने की शक्ति प्रदान करती हैं। आज प्रत्येक व्यक्ति को उनकी शिक्षाओं को आत्मसात कर भक्ति, सद्भाव और धर्मपरायण जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए।
इस अवसर पर छात्र-छात्राओं के बीच भाषण, निबंध लेखन, सस्वर कविता वाचन एवं पोस्टर निर्माण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को निदेशक एवं प्राचार्य द्वारा प्रशस्ति पत्र एवं मेडल देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन कृष्ण कुमार ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन संतोष प्रसाद ने किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में शिक्षक वीरेंद्र शाह, मुकेश भारती, दिनेश कुमार, नीरा शर्मा, नीलम कुमारी, सरिता दुबे, सुनीता कुमारी, चंदा कुमारी, वर्षा कुमारी, मधु कुमारी, शिवानी कुमारी, आलोक रंजन, आदित्य कुमार, पूजा प्रकाश सहित अन्य शिक्षकों की सराहनीय भूमिका रही।

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