गढ़वा। बीएसकेडी पब्लिक स्कूल में रविवार को सीबीपी (कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम) के तहत “जेंडर सेंसिटिविटी इन स्कूल” विषय पर प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण में बीएसकेडी पब्लिक स्कूल एवं शांति निवास के शिक्षक-शिक्षिकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का उद्घाटन विद्यालय के निदेशक संजय सोनी, अध्यक्ष शोभा सोनी, प्राचार्य रीना कुमारी तथा रिसोर्स पर्सन चिंशु सिंह एवं राहुल सिंह ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
प्रशिक्षण के दौरान रिसोर्स पर्सन चिंशु सिंह ने जेंडर संवेदनशीलता की अवधारणा पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल लड़के और लड़कियों को समान मानने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा, भावनाओं और क्षमताओं का सम्मान करना भी इसमें शामिल है। उन्होंने बताया कि बच्चों के मन में लैंगिक भेदभाव की शुरुआत अक्सर छोटी-छोटी बातों से होती है, जिसे शिक्षक अपने व्यवहार और भाषा के माध्यम से बदल सकते हैं।
वहीं, राहुल सिंह ने कहा कि विद्यालय ऐसा स्थान होना चाहिए, जहां हर बच्चा बिना किसी भेदभाव के अपनी प्रतिभा के अनुसार आगे बढ़ सके। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि खेल, शिक्षा, नेतृत्व या किसी भी क्षेत्र में अवसर का आधार जेंडर नहीं, बल्कि बच्चे की रुचि और मेहनत होनी चाहिए। प्रशिक्षण के दौरान समूह चर्चा एवं गतिविधियों के माध्यम से शिक्षकों को व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी गई।
इस अवसर पर निदेशक संजय सोनी ने कहा कि “जेंडर समानता किसी एक वर्ग को आगे बढ़ाने की नहीं, बल्कि हर बच्चे को समान अवसर देने की सोच है।” उन्होंने कहा कि शिक्षक अपने व्यवहार से बच्चों को प्रभावित करते हैं, इसलिए विद्यालय में किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने शिक्षकों से आह्वान किया कि वे जेंडर संवेदनशीलता को अपने दैनिक व्यवहार में शामिल करें और बच्चों के लिए सुरक्षित व सम्मानजनक वातावरण तैयार करें।
प्रशिक्षण में अल्पना सोनी, जूही कुमारी, चंदा कुमारी, स्तुति कुमारी, सोनम कुमारी, निस्बत सहित अन्य शिक्षक-शिक्षिकाओं ने सक्रिय सहभागिता निभाई। कार्यक्रम का संचालन सोनू कुमार एवं राजू रंजन चौधरी ने किया।
समापन अवसर पर विद्यालय प्रबंधन की ओर से दोनों रिसोर्स पर्सन को अंगवस्त्र एवं मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। साथ ही प्रशिक्षण से प्राप्त सीख को विद्यालय की कार्य संस्कृति में शामिल करने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य विद्यालय में ऐसा वातावरण तैयार करना रहा, जहां प्रत्येक विद्यार्थी को उसकी क्षमता के आधार पर समान अवसर मिल सके।
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