गढ़वा । स्वाधीनता दिवस के अवसर पर कला साधिका संध्या सुमन ने कहा कि भारत की आज़ादी असंख्य बलिदानों, संघर्षों और अदम्य साहस की अमर गाथा है। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त केवल उत्सव का दिन नहीं, बल्कि उन ज्ञात-अज्ञात वीरों और वीरांगनाओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है, जिन्होंने अपना सर्वस्व देश के लिए न्योछावर कर दिया।
संध्या सुमन ने बताया कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भारतीय महिलाएं सामाजिक बंधनों में जकड़ी हुई थीं, लेकिन जब देश ने पुकारा तो उन्होंने सभी बाधाओं को तोड़ते हुए अपने साहस और राष्ट्रप्रेम का परिचय दिया। रानी लक्ष्मीबाई, बेगम हज़रत महल, सरोजिनी नायडू, अरुणा आसफ़ अली, उषा मेहता और कस्तूरबा गांधी जैसी वीरांगनाओं के योगदान ने स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा और शक्ति प्रदान की।
उन्होंने कहा कि इन वीरांगनाओं ने न केवल अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष किया, बल्कि समाज की रूढ़ियों और असमानताओं से भी लड़ाई लड़ी। उन्होंने यह सिद्ध किया कि साहस किसी लिंग का मोहताज नहीं होता, बल्कि दृढ़ संकल्प का परिणाम होता है।
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