Ticker

6/recent/ticker-posts

स्वर सम्राट मोहम्मद रफ़ी की पुण्यतिथि पर गढ़वा में सजी सुरों की भावभीनी श्रद्धांजलि सभा

गढ़वा। संगीत जगत के अमर गायक स्वर सम्राट मोहम्मद रफ़ी   की 46वीं पुण्यतिथि के अवसर पर सारेगामा म्यूज़िकल कारवां, गढ़वा द्वारा गीतों भरी श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ नगर परिषद गढ़वा की उपाध्यक्ष श्रीमती अनिता प्रसाद ने रफ़ी साहब की तस्वीर पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर किया।
कार्यक्रम की शुरुआत गायक बसंत कुमार रवि ने “तुझ सा ना कोई फनकार आया, मोहम्मद रफ़ी तू बहुत याद आया” गीत प्रस्तुत कर की। इसके पश्चात आयोजनकर्ता एवं गायक उमेश विश्वकर्मा ने “तू इस तरह से मेरी ज़िंदगी में शामिल है”, “मेरे दोस्त किस्सा ये क्या हो गया” जैसे गीतों के साथ प्रभा विश्वकर्मा के साथ युगल गीत “जान चली जाए जीया नहीं जाए” प्रस्तुत कर समां बांध दिया।
कार्यक्रम में राजकुमार ने “जब मुहब्बत जवान होती है” एवं प्रभा विश्वकर्मा के साथ “तुमसे दूर रहके”, “ये पर्दा हटा दो जरा मुखड़ा दिखा दो” गीत गाए। वहीं विनोद कुमार सिंह ने “गुलाबी आँखें जो तेरी देखी”, “बदन पे सितारे समेटे हुए” और प्रभा विश्वकर्मा के साथ “कोयल बोली दुनिया डोली”, “डफ़ली वाले डफ़ली बजा” प्रस्तुत किया।
बसंत कुमार रवि ने “मेरे दोस्त किस्सा ये क्या हो गया”, “नफ़रत की दुनिया को छोड़ कर” तथा प्रभा विश्वकर्मा के साथ “आशाओं के सावन में”, “तेरे इश्क का मुझ पे” गीतों से माहौल को भावुक बना दिया। वहीं विजय प्रताप देव ने “पत्थर के सनम तुझे हमने मुहब्बत का ख़ुदा जाना” और प्रभा विश्वकर्मा के साथ “आदमी मुसाफिर है”, “वादा कर ले सजना” प्रस्तुत किया।
मुकेश कुमार ने “तुम मुझे यूं भुला ना पाओगे”, “चाहूंगा मैं तुझे सांझ सवेरे” गाकर श्रद्धांजलि दी। पंकज कुमार ने “ओ मेरी महबूबा” तथा प्रभा विश्वकर्मा के साथ “कितना प्यारा वादा है” प्रस्तुत किया। वहीं कमलेश कुमार सिन्हा ने “जानेवालों जरा मुड़ के देखो मुझे”, “बाबुल की दुआएं लेती जा”, “राम जी की निकली सवारी” गाए। अंत में सोनू कुमार ने “ये रेशमी जुल्फें ये शरबती आँखें” गाकर कार्यक्रम को भावपूर्ण समापन दिया।
इस अवसर पर शशिकांत शर्मा, भाजपा अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष अनवर शाह, आशा विश्वकर्मा, लौकिक, सात्विक, मौलिक सहित बड़ी संख्या में महिलाएं एवं कलाकार परिवार के सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सभी कलाकारों ने रफ़ी साहब के अमर गीतों की प्रस्तुति देकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

Post a Comment

0 Comments