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राष्ट्रनिर्माण के प्रेरणास्रोत डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर विश्वविद्यालय में गूंजे आदर्शों के स्वर

गढ़वा। बाबू दिनेश सिंह विश्वविद्यालय में  की 125वीं जयंती श्रद्धा एवं सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षकों, अधिकारियों एवं विद्यार्थियों ने उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विश्वविद्यालय के कुलाधिपति  दिनेश प्रसाद सिंह ने कहा कि डॉ. मुखर्जी एक दूरदर्शी शिक्षाविद्, प्रखर राष्ट्रवादी एवं अद्वितीय व्यक्तित्व के धनी थे। उन्होंने शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का सबसे सशक्त माध्यम माना और युवाओं को ज्ञान, चरित्र एवं राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित किया। उनके आदर्श आज भी समाज एवं राष्ट्र के लिए मार्गदर्शक हैं।
वहीं, कुलपति प्रो. एम. के. सिंह ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन राष्ट्रभक्ति, ईमानदारी, शिक्षा एवं जनसेवा का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक गौरव एवं उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को सदैव सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उनके विचार युवाओं को आत्मनिर्भर एवं जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देते हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे उनके आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात कर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं। कार्यक्रम का समापन सामाजिक उत्तरदायित्व, उत्कृष्ट शिक्षा एवं राष्ट्र निर्माण के प्रति सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।
इस अवसर पर डीएसडब्ल्यू डॉ. अरविन्द कुमार सिंह, परीक्षा नियंत्रक डॉ. ललन कुमार, कुलसचिव डॉ. गोकुल आचार्जी, डॉ. सुनीता गुप्ता सहित विभिन्न संकायों के डीन, प्राचार्य, शिक्षक, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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