डंडई (गढ़वा)। झारखंड सरकार के कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग (कृषि प्रभाग) के तहत संचालित झारखंड राज्य मिलेट मिशन योजना 2026-27 के अंतर्गत बुधवार को डंडई एवं पचौर पंचायत में मिलेट मिशन शिविर का आयोजन किया गया। डंडई पंचायत भवन में पूर्वाह्न 11:00 बजे तथा पचौर पंचायत भवन में अपराह्न 1:30 बजे आयोजित शिविर में बड़ी संख्या में किसानों, जनप्रतिनिधियों, कृषक मित्रों एवं प्रज्ञा केंद्र (CSC) संचालकों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में किसानों को “हर किसान मिलेट किसान” अभियान के उद्देश्यों के साथ-साथ मिलेट मिशन योजना की विस्तृत जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि योजना के तहत रागी (मड़ुवा), ज्वार, बाजरा, सावाँ एवं कोदो जैसी मोटे अनाज की खेती करने वाले किसानों को प्रति एकड़ 3,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी, जबकि अधिकतम 5 एकड़ तक 15,000 रुपये का लाभ मिल सकता है।
शिविर को संबोधित करते हुए बीटीएम सत्येन्द्र कुमार ने कहा कि इस वर्ष कम वर्षा की स्थिति को देखते हुए किसानों को धैर्य रखते हुए वैज्ञानिक पद्धति से खेती करनी चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि पर्याप्त वर्षा होने तक धान की रोपाई में जल्दबाजी न करें। जिन किसानों ने धान की नर्सरी तैयार कर ली है, वे उसकी नियमित देखभाल करें तथा खेतों की नमी को संरक्षित रखें।
उन्होंने कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली मिलेट फसलों की खेती अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि बदलते जलवायु परिदृश्य में मोटे अनाज किसानों के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकते हैं। साथ ही खेत की समय पर जुताई, बीज उपचार, संतुलित उर्वरक उपयोग, खरपतवार नियंत्रण एवं वर्षा के बाद वैज्ञानिक तरीके से बुवाई करने की सलाह दी गई।
अधिकारियों ने बताया कि योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को प्रज्ञा केंद्र (CSC) के माध्यम से मिलेट मिशन पोर्टल पर निबंधन कराना अनिवार्य है। इसके लिए आधार कार्ड, बैंक खाता, मोबाइल नंबर, अद्यतन भू-स्वामित्व प्रमाण पत्र या राजस्व रसीद, वंशावली, घोषणा पत्र एवं बटाईदार किसान के लिए सहमति पत्र सहित आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे।
शिविर में यह भी जानकारी दी गई कि योजना के तहत सर्वश्रेष्ठ मिलेट उत्पादक किसानों एवं मिलेट बीज बैंक को नकद पुरस्कार देने का प्रावधान है। अंत में किसानों से अधिक से अधिक संख्या में योजना से जुड़ने एवं मोटे अनाज की खेती अपनाकर अपनी आय बढ़ाने की अपील की गई। पंचायत प्रतिनिधियों एवं प्रज्ञा केंद्र संचालकों से भी किसानों को योजना का लाभ दिलाने में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया गया।
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